शतरंज में छत्तीसगढ़ को आज भी तलाश है अपने पहले आईएम और ग्रैंड मास्टर्स की. चेस में भारत की बादशाहत है, लेकिन प्रदेश में आज तक कोई भी खिलाड़ी इस उच्च स्तरीय नॉर्म्स ग्रैंडमास्टर की उपाधि को हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाया है.
चेस छठी शताब्दी में भारत में जन्मा पूर्ण रूप से देशी खेल है. इसे पूर्व में चतुरंग के रूप में जाना जाता था. उस समय इस खेल के माध्यम से सैन्य रणनीति को बनाने व समझने में ये सहायक होता था.
भारत में शतरंज को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में पद्म विभूषण विश्वनाथन आनंद की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रही है. भारत के पहले ग्रैंड मास्टर बने आनंद ने ये कारनामा सन 1988 में कर दिखाया था. मौजूदा समय में भारत के पास 98 ग्रैंड मास्टर्स है.
छत्तीसगढ़ राज्य शतरंज संघ प्रदेश में चेस की गतिविधियों को विधिवत आगे बढ़ाने की दिशा में निरंतर जिला, राज्य, राष्ट्रीय एवं इंटरनेशनल नॉर्म्स की स्पर्धाओं की मेज़बानी में अपनी स्थापना (वर्ष 2001) से लेकर अब तक कार्य करते आ रहा है. शतरंज में आयोजित होने वाली स्पर्धा अंडर 7 आयु वर्ग से लेकर 9,13,15,17,19 और सीनियर कैटेगरी में बॉयज़ व गर्ल्स में आयोजित होता है.
वर्तमान समय में राज्य शतरंज संघ द्वारा आयोजित सभी स्पर्धाएं FIDE रेटिंग्स टूर्नामेंट होती है. फिडे का अर्थ है की इसके अंतर्गत होने वाले टूर्नामेंट अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ द्वारा मान्यता प्राप्त होती है. इसमें खेलने वाले प्रत्येक खिलाड़ी की एलो रेटिंग (Elo Rating) तय होती है या वे इसमें भाग लेकर अपनी नई रेटिंग हासिल कर सकते हैं.

नए खिलाड़ी को शतरंज में FIDE रेटिंग कैसे मिलती है?
शतरंज में खिलाड़ियों की रेटिंग्स उनके स्तर को निर्धारित करते है. किसी भी नए खिलाड़ी की आधिकारिक क्षमता का आकलन FIDE (विश्व शतरंज महासंघ) द्वारा जारी की जाने वाली रेटिंग से किया जाता है। FIDE रेटिंग प्राप्त करने के लिए खिलाड़ी को पहले FIDE ID बनवानी होती है और उसके बाद उसे रेटेड प्रतियोगिताओं में भाग लेना होता है।
वर्तमान नियमों के अनुसार, नए खिलाड़ी को कम से कम 5 रेटेड खिलाड़ियों के विरुद्ध वैध मुकाबले खेलने होते हैं तथा कम से कम 0.5 अंक (ड्रॉ या उससे अधिक) अर्जित करने होते हैं। आवश्यक मानदंड पूरे होने पर खिलाड़ी की पहली FIDE रेटिंग जारी की जाती है, जो प्रत्येक माह प्रकाशित होने वाली रेटिंग सूची में दिखाई देती है।
FIDE रेटिंग किसी खिलाड़ी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शतरंज क्षमता का प्रमाण होती है और भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का महत्वपूर्ण आधार बनती है।
18 वर्ष से कम (Under-18):
यदि खिलाड़ी की रेटिंग 2300 से कम है, तो उसका K-factor = 40 रहता है। इससे अच्छी प्रतियोगिताओं में रेटिंग अपेक्षाकृत तेज़ी से बढ़ या घट सकती है।
18 वर्ष या उससे अधिक:
सामान्यतः K-factor = 20 रहता है (जब तक खिलाड़ी 2400 तक नहीं पहुँचता)। इसलिए रेटिंग में बदलाव अपेक्षाकृत धीमा होता है।
टाइटल के लिए आवश्यक मानदंड
FM (FIDE Master): 2300 रेटिंग
IM (International Master): 2400 रेटिंग + 3 IM Norms
GM (Grandmaster): 2500 रेटिंग + 3 GM Norms
इन टाइटलों के लिए 18 वर्ष से कम या अधिक होने का कोई अलग नियम नहीं है। यदि कोई खिलाड़ी कम उम्र में ही आवश्यक रेटिंग और नॉर्म पूरे कर लेता है, तो वह उसी उम्र में IM या GM बन सकता है।
इंटरनेशनल मास्टर (IM) बनने के लिए खिलाड़ी को 2400 FIDE रेटिंग तक पहुँचना होता है। इसके साथ 3 IM Norms प्राप्त करना अनिवार्य होता है। ये नॉर्म्स अंतरराष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर मिलते हैं।
ग्रैंडमास्टर (GM) बनने के लिएखिलाड़ी को 2500 FIDE रेटिंग तक पहुँचना होता है।साथ ही 3 GM Norms अर्जित करना आवश्यक होता है। GM नॉर्म प्राप्त करने के लिए खिलाड़ी को मजबूत अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के विरुद्ध निर्धारित प्रदर्शन करना पड़ता है।
IM Norm कैसे प्राप्त होता है?
IM Norm प्राप्त करने के लिए खिलाड़ी को FIDE के टाइटल नॉर्म टूर्नामेंट या ऐसे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेलना होता है जो नॉर्म के लिए मान्य हो।मुख्य शर्तें:प्रतियोगिता FIDE द्वारा नॉर्म के लिए स्वीकृत हो। कम से कम 9 राउंड खेले जाएँ। खिलाड़ी का टूर्नामेंट परफॉरमेंस रेटिंग (TPR) कम से कम 2450 हो। प्रतियोगिता में विभिन्न देशों (Federations) के खिलाड़ी शामिल हों। खिलाड़ी के प्रतिद्वंद्वियों में निर्धारित संख्या में IM, GM या अन्य मान्यता प्राप्त टाइटलधारी खिलाड़ी हों। सभी तकनीकी नियम (Pairing, Federation Mix, Title Mix आदि) पूरे हों।यदि ये सभी शर्तें पूरी हो जाती हैं, तो खिलाड़ी को 1 IM Norm मिलता है।
GM Norm कैसे प्राप्त होता है?
GM Norm प्राप्त करना और अधिक कठिन होता है क्योंकि यह विश्व स्तर की सर्वोच्च शतरंज उपाधि है।मुख्य शर्तें:प्रतियोगिता फिडे टाइटल नॉर्म नियमों के अनुरूप हो।कम से कम 9 राउंड हों। खिलाड़ी का टूर्नामेंट परफॉरमेंस रेटिंग (TPR) कम से कम 2600 हो।कई मजबूत ग्रैंडमास्टर्स (GM) तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के विरुद्ध खेलना आवश्यक होता है। विभिन्न देशों के खिलाड़ियों के विरुद्ध निर्धारित संख्या में मुकाबले होने चाहिए।फिडे के सभी तकनीकी नियम पूरे होने चाहिए। सभी शर्तें पूरी होने पर खिलाड़ी को 1 GM Norm प्रदान किया जाता है।
चेस के तकनिकी पहलुओ को तथ्यों व नियमो के आधार पर व्याख्या को हमने अभी तक आपके समक्ष रखा. अब ये सवाल कि राज्य शतरंज संघ की इस खेल को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका के बावजूद आज तक प्रदेश को एक अदद आईएम या जीएम क्यों नहीं मिल सका. क्या टैलेंट की कमी है ? या कोई और वजह है ? इन प्रश्नो के उत्तर व तकनिकी बिन्दुओ को समझने के लिए हमने छत्तीसगढ़ प्रदेश शतरंज संघ के महासचिव श्री विनोद राठी से विस्तार से बात किया.
आइये इस पुरे विषय को साइंटिफिक रूप से समझने का प्रयास करते है. श्री विनोद राठी राज्य शतरंज संघ की स्थापना से पूर्व अविभाजित मध्यप्रदेश में सन 1976 से राज्य संघ में महासचिव की जिम्मेदारी को निभाते आ रहे है. आप भारतीय चेस फेडरेशन के सह सचिव और उपाध्यक्ष भी रह चुके है. श्री राठी के चेस प्रशासक के रूप में इस लम्बे सफर में भारतीय शतरंज ने कई विश्व कीर्तिमान स्थापित किये.
श्री राठी ने कहा कि जैसे सभी खेलो के स्टैंडर्ड में उत्तरोक्तर वृद्धि देखा जा रहा है, यह परिस्थिति चेस के साथ भी है. इस सन्दर्भ में यदि देखा जाये तो सन 1950 में सबसे यंगेस्ट ग्रैंड मास्टर की उम्र 26 वर्ष थी जो की तत्कालीन यूएसएसआर से थे. अब 12 वर्ष और कुछ महीने में खिलाड़ी इस कठिन नॉर्म्स को हासिल कर ले रहे है. भारत के गुकेष ने भी 12 वर्ष और 7 महीने में जीएम बनने में सफल हो गए थे. खेल में यंगेस्ट खिलाड़ियों के दबदबे को विश्व स्तर पर दर्शाता ये खास चार्ट इस बात की ओर इंगित करता है की शतरंज में अब कोई भी रिकॉर्ड बन और टूट सकते है.

पेशेवर शतरंज खिलाड़ी तैयार करने के लिए ग्रास रुट स्तर से ध्यान देने की आवश्यकता है ?इस खास सवाल के जवाब में श्री राठी ने कहा कि शतरंज में टॉप खिलाड़ी को तैयार करने में चार मुख्य पिलर्स पर काम किया जाना चाहिए-

1. कम से कम उम्र में जुड़े खिलाड़ी:- शतरंज की प्रोफेशनल शुरुआत 5 वर्ष की उम्र से शुरू हो जाना चाहिए. इस दौरान बच्चे का खेल को लेकर इंटरेस्ट और उसके स्ट्रैटेजी एवं सोच ( अग्रेसिव है या डिफेंसिव ) को समझना कोच के लिए आसान होता है. शतरंज में अंडर 7 से जिला स्तरीय टूर्नामेंट शुरू हो जाते है, ऐसे में टैलेंटेड खिलाड़ियों को रियल टाइम आइडेंटिफाई करना आसान हो जाता है.
2. अभिभावक खिलाड़ी के फाउंडेशन को गढ़ने में निभाते है मुख्य भूमिका :- बच्चे के छोटे उम्र में शतरंज से जब जुड़ाव होता है तो पैरेंट की भूमिका उसको विश्व स्तर तक ले जाने में सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है. बच्चा यदि परफॉर्म करने लगे ऐसे में उसको बेहतरीन कोचिंग, प्लेइंग कैपेसिटी को बढ़ाने की दिशा में उसका ज्यादा से ज़्यादा समय चेस में देना, मेन्टल सपोर्ट प्रोवाइड करना, चेस को प्रायोरिटी सूची में वरियता देना एक बच्चे को प्रोफेशनल प्लेयर बनने की पहली सीढ़ी होती है.
3. स्टेट एसोसिएशन की सक्रिय भूमिका से खिलाड़ियों को मिलते है ज़्यादा मौके:- यहाँ संघ की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है. संघ द्वारा ओपन के नियमित टूर्नामेंट्स से खिलाड़ियों को ज़्यादा से ज़्यादा मौके खेलने को मिलते है. संघ द्वारा पोटेंशियल खिलाड़ियों के लिए विशेष कैम्प का आयोजन किया जाता है. ऐसे कैम्प में उभरते खिलाड़ियों को चिन्हांकित कर उनको देश के टॉप ग्रैंड मास्टर्स से सिखने का मौक़ा मिलता है, जो खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
4. शासन व स्पांसर का सहयोग खिलाड़ी को देता है विश्व स्तरीय पहचान:- इस अंतिम श्रेणी में जब खिलाड़ी के खेल में निखार आ जाता है तो उसे अपने नॉर्म्स में वृद्धि के लिए यूरोपियन टूर्नामेंट्स में ऑफलाइन हिस्सेदारी करनी होती है. इस वक़्त खिलाड़ियों को फाइनेंसियल सहयोग की आवश्यकता होती है. ऐसे में स्पांसर या सरकार का अहम् भूमिका होता है जो उस दौरान खिलाड़ी को यदि सहयोग कर पाते है तो कीर्तिमान ज़्यादा दूर नहीं रह जाता है.
चेस को भारत सरकार ने ए श्रेणी के खेल में शुमार कर रखा है. भारतीय खिलाड़ियों के रेटिंग्स के आधार पर इंडिया टीम बनती है. जो ओलिंपियाड, एशियाई खेल, कॉमन वेल्थ, वर्ल्ड चैंपियनशिप एवं वर्ल्ड ओलिंपियाड जैसे वैश्विक स्पर्धाओं में हिस्सा लेते है.
छत्तीसगढ़ क्यों आज भी जीएम या आईएम प्रोड्यूस नहीं कर पाया ?
राज्य के खिलाड़ियों में टैलेंट की कमी है ऐसा नहीं है. श्री राठी से जब हमने इस विषय को लेकर जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि खिलाड़ी में जूनून सर्व प्रथम पैरेंट्स के इन्वॉल्वमेंट से पैदा होता है. कम उम्र से बच्चे को शतरंज से जोड़ना, फिडे द्वारा सर्टिफाइड कोच के माध्यम से सही ट्रेनिंग सुलभ करवाना, चेस को सभी दूसरे एक्टिविटी से कही ज़्यादा प्रायोरिटी देना, सभी टूर्नामेंट्स में हिस्सा न लेकर सिलेक्टेड टूर्नामेंट में पूरी तैयारी के साथ उतारना, राज्य संघ के चयन ट्रायल में अवश्य हिस्सा लेना, नियमित 6 से 8 घंटे केवल चेस पर फोकस करना ये महत्वपूर्ण होता है उच्च स्तरीय नॉर्म्स को हासिल करने में.
श्री राठी ने कहा कि फिडे के नियमानुसार चेस में अंडर 18 तक खिलाड़ियों की रेटिंग्स में 2400 पॉइंट तक बहुत तेज़ी से ऊपर आने का मौक़ा होता है, ऐसे में कम उम्र में जीएम और आईएम बनने की सम्भावना सबसे ज्यादा प्रबल होती है. पेरेंट्स, कोच, संघ व खिलाड़ी को कम से कम उम्र में ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को इस खेल से बच्चे को उसके रुची अनुसार जोड़ने का प्रयास करना होगा जिससे परिणाम हासिल करने की सम्भावना बढ़ेगी.
श्री राठी ने अपने दशकों के अनुभव को साझा करते हुए कहते है कि चेस में ग्रैंड मास्टर का सपना देखने वाले माता पिता या खिलाड़ियों को शतरंज को जीवन में सर्वोच्च प्राथमिकता बाकी सभी जरूरी चीज़ो को पीछे रखकर देना पड़ेगा. कोई बच्चा यदि नेशनल चैंपियनशिप में टॉप 30 पोजीशन हासिल कर रहा है, तो इसका मतलब उस खिलाड़ी में पर्याप्त पोटेंशियल है, सिर्फ जरूरत है उस पर काम करने की.
पेरेंट्स को सही सर्टिफाइड कोच पर इन्वेस्ट करना पड़ेगा जो खिलाड़ी में हर परिस्थिति से जीत तक के सफर को तय करने का जज़्बा तैयार करेगा. सरकार को भी टैलेंटेड खिलाड़ियों को उनकी रेटिंग्स को बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में हिस्सा लेने हेतु इनिशियल सपोर्ट उपलब्ध करवाने की जरूरत है.
ज्ञात हो वर्तमान में फिडे इंस्ट्रक्टर (कोच ) ग्रुप ने यदि प्रशिक्षण देते है तो न्यूनतम 200 रुपये घंटे की फीस चार्ज करते है. यदि प्रशिक्षण वन टू वन हो तो 500 रुपये प्रति घंटे का हो जाता है. टॉप रेटेड या टाइटल होल्डर द्वारा दिया जाने वाला प्रशिक्षण औसतन चार से पाँच हज़ार रुपये घंटे की फीस का भुगतान खिलाड़ियों को करना पड़ता है.
श्री राठी ने खेल न्यूज़ को यह भी बताया कि टॉप रेटेड प्लेयर्स को आज पेट्रोलियम प्रमोशन बोर्ड, रेलवेज आदि कई विभागों में नौकरी में मौके व प्राथमिकताएं मिल रही है. साथ ही देश के कई टॉप कम्पनी के द्वारा स्पांसर भी किया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ में चेस फॉर एव्री वन, चेस इन स्कूल्स, शतरंज के किट का आदिवासी अंचल तक निः शुल्क वितरण, सरगुजा व बस्तर संभाग के लिए विशेष स्पर्धा का आयोजन, हालिया आयोजित हुए चीफ मिनिस्टर नेशनल टीम मेन एंड वीमेन चैंपियनशिप, वार्षिक कैलेंडर के अनुसार जिला व स्टेट चैंपियनशिप, राज्य के 23 जिलों में सक्रिय जिला इकाइयों का संचालन, फिडे ऑर्बिटर व प्रशिक्षकों हेतु सेमिनार एवं परीक्षा का आयोजन आदि महत्वपूर्ण कार्यो को राज्य संघ द्वारा बहुत कुशलता पूर्वक संपन्न किया जा रहा है. चेस में आवश्यकता है एक कंबाइंड आइडेंटिफाइड एफर्ट का जो खिलाड़ी को उसकी क्षमतानुसार नॉर्म्स तक पहुंचाएगा और राज्य के पहले ग्रैंड मास्टर के इस सूखे को खत्म करेगा.
