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KHELNEWZ BILASPUR DESK खेल सृष्टि भारतीय दृष्टि विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का कल न्यायधानी में हुआ भव्य शुभारंभ

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर एवं क्रीड़ा भारती, छत्तीसगढ़ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी खेल सृष्टि : भारतीय दृष्टि का शुभारंभ कल विश्वविद्यालय परिसर में गरिमामय वातावरण में हुआ। संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय खेल-दर्शन, सांस्कृतिक परंपराओं एवं समकालीन खेल परिदृश्य के मध्य सार्थक संवाद स्थापित करना तथा खेलों के भारतीय दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि श्री प्रसाद महांकर, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, क्रीड़ा भारती तथा समारोह की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) एल. पी. पटेरिया, कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय ने की।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) एल. पी. पटेरिया ने कहा कि भारतीय संस्कृति में खेल केवल प्रतियोगिता या मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन, नैतिक मूल्यों तथा राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति के अनुरूप खेल एवं शिक्षा के समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए भारतीय खेल परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु अनुसंधान और नवाचार को समय की आवश्यकता बताया।

मुख्य अतिथि एवं संगोष्ठी के मुख्य वक्ता श्री प्रसाद महांकर ने अपने उद्बोधन में भारतीय खेल-दर्शन की मूल अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में खेल सदैव शरीर, मन, बुद्धि एवं चरित्र के समन्वित विकास का माध्यम रहे हैं। उन्होंने स्वदेशी खेलों के संरक्षण, युवाओं को भारतीय खेल संस्कृति से जोड़ने तथा खेलों को राष्ट्र निर्माण के प्रभावी साधन के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।

दोपहर बाद आयोजित तकनीकी सत्रों का शुभारंभ प्रो. सी. डी. अगाशे, प्रोफेसर, शारीरिक शिक्षा विभाग, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा भारतीय खेल-दर्शन एवं मूल्यपरक खेल शिक्षा विषय पर व्याख्यान से हुआ। इसके पश्चात प्रो. वी. एस. राठौर, प्रोफेसर, शारीरिक शिक्षा विभाग, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने भारतीय खेल परंपरा, राष्ट्र निर्माण में खेलों की भूमिका तथा खेल संस्कृति के संरक्षण पर अपने विचार रखे।

अंतरराष्ट्रीय सत्र में ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा से श्री विजय दुबे ने वैश्विक खेल परिदृश्य एवं भारतीय खेल मूल्यों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता पर अपने विचार व्यक्त किए। इसके पश्चात कनाडा के डॉ. समीर भागीरथी, मेंटर, कोचेस एसोसिएशन ऑफ ओंटारियो ने आधुनिक कोचिंग पद्धतियों, खिलाड़ी विकास तथा वैज्ञानिक प्रशिक्षण के साथ भारतीय जीवन मूल्यों के समन्वय पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. प्रमोद कुमार तिवारी ने आयोजन की रूपरेखा, उद्देश्य एवं संगोष्ठी की कार्ययोजना से उपस्थित प्रतिभागियों को अवगत कराया तथा सभी अतिथियों, विद्वानों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में श्री कौशलेन्द्र जी प्रांत संगठन मंत्री, क्रीड़ा भारती की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने आयोजन की सफलता हेतु अपने प्रेरक विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी मंच संचालन प्रो. रत्नेश सिंह, जिला सह मंत्री, क्रीड़ा भारती, बिलासपुर द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. तर्णिश गौतम ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी के प्रथम दिवस में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधार्थियों, खेल विशेषज्ञों, प्रशिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। प्रत्येक सत्र के उपरांत प्रश्नोत्तर एवं विचार-विमर्श ने कार्यक्रम को अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं सार्थक बनाया। प्रथम दिवस का समापन हाई-टी के साथ हुआ।

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