5 वर्षीय शतरंज प्रतिभा ईरा अर्नी ने मलेशिया के कुआलालंपुर में 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित कॉमनवेल्थ स्कूल चेस चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली भारत की सबसे कम उम्र की बालिका बनकर इतिहास रच दिया है। उनके बड़े भाई वेद अर्क का भी ओपन सेक्शन में इस अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व करने के लिए चयन हुआ है।ईरा ने अपनी प्रतिस्पर्धी शतरंज यात्रा की शुरुआत मात्र 3 वर्ष की कोमल आयु में बीजापुर से की थी।

पूर्व में बीजापुर और बस्तर संभाग में लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद की वजह से उच्चस्तरीय प्रशिक्षण तक पहुँचना अत्यंत कठिन रहा है।बीजापुर में किसी भी स्थानीय विशेष शतरंज अकादमी के न होने और आवागमन के बेहद सीमित साधनों के बावजूद, ईरा ने विभिन्न जिलों और राज्यों में जाकर प्रतिस्पर्धा करने के लिए दुर्गम रास्तों से होकर लगातार लंबी और कठिन यात्राएँ कीं। आज, वह मात्र 5 वर्ष की आयु में एक अंतरराष्ट्रीय स्कूल चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली शतरंज के तीनों प्रतिस्पर्धी प्रारूपों क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज़ में सबसे कम उम्र की भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।

इस अंतरराष्ट्रीय चयन से पूर्व, ईरा वर्ष 2025 में गुवाहाटी में आयोजित नेशनल स्कूल चेस चैंपियनशिप (अंडर-07 बालिका वर्ग) में मात्र 4 वर्ष की उम्र में भाग लेकर इस राष्ट्रीय स्पर्धा के इतिहास की सबसे कम उम्र की प्रतिभागी बनी थीं।ईरा के इस असाधारण सफर ने आदिवासी गाँवों में जहाँ कभी शतरंज की बिसात दुर्लभ हुआ करती थी, वहाँ ईरा की यह सफलता सैकड़ों बालिकाओं और नन्हें बच्चों को सशक्तिकरण, अनुशासन और रणनीतिक सोच के माध्यम के रूप में शतरंज अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ प्रदेश शतरंज संघ ने खेल व युवा कल्याण विभाग की सहायता से संभाग स्तरीय शतरंज स्पर्धा का सफल संचालन बीते कई वर्षो से लगातार करता आ रहा है. आज संभाग स्तरीय स्पर्धा में न केवल बड़ी संख्या में खिलाड़ियों की एंट्री दर्ज हो रही है बल्कि वहां के टैलेंट राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अपना लोहा मनवा रहे है.
